जीवन की कुछ कविताएं; मन करता है किसी से कहें सुनाएं
क्यूंकि हम सब जंगल में रहते हैं
ओझल तन मन...जीवन.. हम तुम केवल बंधे बंधे.. हम राही केवल, नहीं हमराही... चले आते हैं, चले जाते हैं... सुबह शाम बिन कहे सुने.. न हाथों का मेल....
क्यूंकि हम सब जंगल में रहते हैं
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