आज परम अहसास हुआ..

आज परम अहसास हुआ..
दो बातें हुई जुड़ी हुईं..
मैं खुश रहना जो चाहूं..
पहले सुरक्षित करनी होगी..
दूसरों की खुशी..
मेरा घर पहुंचना ..
सुकून घर का..
और लोग भी पा लें..
घोंसला मन का..
मन मेरा होगा पुलकित..
महफूज़ करनी होगी..
पहले औरों की भी हंसी..

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ओझल तन मन...जीवन.. हम तुम केवल बंधे बंधे.. हम राही केवल, नहीं हमराही...

ओझल तन मन...जीवन.. हम तुम केवल बंधे बंधे.. हम राही केवल, नहीं हमराही... चले आते हैं, चले जाते हैं... सुबह शाम बिन कहे सुने.. न हाथों का मेल....