Followers

Sunday, February 21, 2021

यदि कोई विवाद ना हो.. मुझे कोई प्रतिवाद ना हो..

यदि कोई विवाद ना हो..

मुझे कोई प्रतिवाद ना हो..।

छेड़ दिया है जो शंखनाद ..

युद्ध की फिर क्यों शुरुवात ना हो..।

ये अतिक्रमण तुम्हारा..!!

मौन हमारा कब तक होगा..

ये दमन हमारा..तुम्हारे द्वारा..

क्योंकर ना प्रतिउत्तर होगा..।

सुख शांति अगर नहीं पसंद तुम्हें..

कब तक ना समर होगा..!

हमको इससे इंकार नहीं..

कि मानवता से प्यार नहीं..

मानव जो तुम रह ना सके..

हमसे भी ना अब सबर होगा..।

वैसे तो समझो इतनी बात..

अपनी अपनी हद में रहो. 

हम नहीं चाहते युद्ध कभी..

तुम भी समझो कि..कुछ भी..

किसी का अप्रिय ना हो..।


16 comments:

  1. सुख शांति अगर नहीं पसंद तुम्हें..

    कब तक ना समर होगा..!

    हमको इससे इंकार नहीं..

    कि मानवता से प्यार नहीं..

    मानव जो तुम रह ना सके..

    हमसे भी ना अब सबर होगा..।
    सही कहा दी। कभी न कभी तो सब्र का बांध टूटेगा ही।

    ReplyDelete
  2. वाह....
    बहुत सुंदर रचना

    ReplyDelete
  3. इस रचना को पढ़ कर लग रहा कि पड़ोसी देशों की तसर्फ इशारा है ।

    सार्थक कृति ।

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सुंदर और प्रभावी रचना के लिये आपका बहुत आभार

    ReplyDelete
  5. प्रिय अर्पिता आपकी रचना कई मोर्चे पर लोहा लेने के लिए तैयार है.
    सारगर्भित सृजन के लिए बहुत शुभकामनाएं..

    ReplyDelete
  6. सार्थक और सारगर्भित रचना। आपके निशाने पर घर के ही लोग लगते हैं।

    ReplyDelete
  7. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (24-02-2021) को     "नयन बहुत मतवाले हैं"  (चर्चा अंक-3987)    पर भी होगी। 
    --   
    मित्रों! कुछ वर्षों से ब्लॉगों का संक्रमणकाल चल रहा है। आप अन्य सामाजिक साइटों के अतिरिक्त दिल खोलकर दूसरों के ब्लॉगों पर भी अपनी टिप्पणी दीजिए। जिससे कि ब्लॉगों को जीवित रखा जा सके। चर्चा मंच का उद्देश्य उन ब्लॉगों को भी महत्व देना है जो टिप्पणियों के लिए तरसते रहते हैं क्योंकि उनका प्रसारण कहीं हो भी नहीं रहा है। ऐसे में चर्चा मंच विगत बारह वर्षों से अपने धर्म को निभा रहा है। 
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

    ReplyDelete
  8. बात तो ठीक ही कही है अर्पिता जी आपने ।

    ReplyDelete
  9. हद मैं रहना भी सिखाना पड़ता है!

    ReplyDelete
  10. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,अर्पिता।

    ReplyDelete
  11. वीर रस में चेतावनी, वाह ...वैसे तो समझो इतनी बात..

    अपनी अपनी हद में रहो.... धन्य हो बहन

    ReplyDelete
  12. वाह!बहुत सुंदर वीर रस से सराबोर सृजन।
    सादर

    ReplyDelete
  13. बहुत खूब। चेतावनी देने का एक अलग सा अंदाज़। स्वाभिमान पर कोई आघात ना हो तब तक प्रतिघात नहीं। उसके बाद यही कुछ। B

    ReplyDelete
  14. बहुत बहुत सुन्दर

    ReplyDelete

आज चले आते हैं वो.....

आज चले आते हैं वो .. मखमली पहल बनकर..! जिनकी कोशिश थी कभी.. ढहा देंगे मेरे सपनों के महल.. तूफानी कहर बन कर..! लेकिन कुछ ऐसे निकले.. मेरी किस...