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हर जुबान कहती है..हर नज़र कहती है..

हर जुबान कहती है..
हर नज़र कहती है..
जिंदगी कहां रहती है..
जिंदगी किधर से गुजरती है ।
उनके अल्फ़ाज़ कहते हैं..
वो सब कैसे रहते हैं..
नज़र कहती है उनकी..
क्या कुछ वो सहते हैं..
गरीबों मुफ्लिसो की ..
दुनिया अमीर होती है.. लेकिन
गर गुजरना कभी उधर से..
ना खोलना कभी..
उनके दर्द के तहखाने..
क्या पता कभी..
ज़िन्दगी हमें भी..
लाए ये दर्द दिखलाने..

ओझल तन मन...जीवन.. हम तुम केवल बंधे बंधे.. हम राही केवल, नहीं हमराही...

ओझल तन मन...जीवन.. हम तुम केवल बंधे बंधे.. हम राही केवल, नहीं हमराही... चले आते हैं, चले जाते हैं... सुबह शाम बिन कहे सुने.. न हाथों का मेल....