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Tuesday, April 27, 2021

जहनसीब होते..जो तुम करीब होते..

जहनसीब होते .........जो तुम करीब होते.....

बेहतरीन लम्हों का गुलदस्ता लिए हुए तुम.....

जीने की कोई मियाद... कोई तरकीब होते.....

आते मुझे देखने.. हालातों का मुआयना करने..

उनसे निकालने की तुम ..कोई ताकीद होते....

हां ......मुस्कुराते तुम.......कुछ निहारते तुम...

दस्तक देते दरवाज़े पर..रोशनी अंदर तक लाते तुम..

तुम आए नहीं..कोई दस्तक कोई आमद नहीं हुई ...

कोई शुरुवात.. कोई नई बात...अब तक नहीं हुई..

नसीब बदलते मेरे...जो तुम हमें नसीब होते......

जहनसीब होते ............जो तुम करीब होते.....

............................................................

8 comments:

  1. नसीब बदलते मेरे...जो तुम हमें नसीब होते......जहेनसीब होते ............जो तुम करीब होते। तुमसे मिला था प्यार कुछ अच्छे नसीब से, हम उन दिनों अमीर थे जब तुम करीब थे। आपने जो लिखा, अच्छा लिखा। और आज अरसे बाद आपको देखकर मुझे जो ख़ुशी मिली है, उसे मैं बयान नहीं कर सकता। आप किसलिए नदारद थीं, आप ही को मालूम होगा। मैं तो बस यही कहूंगा कि इस मुश्किल वक़्त में अपना ख़याल रखिए।

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  2. नसीब बदलते मेरे...जो तुम हमें नसीब होते......

    जहनसीब होते ............जो तुम करीब होते.....वाह! बहुत उम्दा!!!

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  3. क्या बात है अर्पिता जी! एक कसक भरी अभिव्यक्ति!
    नसीब बदलते मेरे...//
    जो तुम हमें नसीब होते......///
    मेरे एक गीत की पंक्तियाँ---
    अप्राप्य से अनुराग ये मन का.
    क्यूँ हुआ कहाँ उत्तर इसका;
    इस राह की ना मंजिल कोई.
    फिर भी क्यों सुखद सफर इसका!!
    भावपूर्ण सृजन की बधाई और शुभकामनाये 🌹🌹🙏❤❤

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  4. बहुत सुंदर

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  5. बहुत सुंदर भावों से सजी सुंदर गजल ।

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  6. बेहद खूबसूरत

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  7. दिल के भावों का आइना बन के उतरे भाव ...
    सुन्दर अभिव्यक्ति ...

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जहनसीब होते..जो तुम करीब होते..

जहनसीब होते .........जो तुम करीब होते..... बेहतरीन लम्हों का गुलदस्ता लिए हुए तुम..... जीने की कोई मियाद... कोई तरकीब होते..... आते मुझे देख...